ऑनलाइन दवा बिक्री विरोध की उठती आवाजें: एआई और नकली दवाओं का खतरा
राजस्थान के विभिन्न जिलों में दवा कारोबारियों ने ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ प्रदर्शन कर सरकार से सख्त नियमों की मांग की है। कई मेडिकल स्टोरों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए नकली और घटिया दवाओं की आपूर्ति, एआई से बने फर्जी प्रिस्क्रिप्शन, और नशीली दवाओं की अवैध खरीद बिक्री को लेकर दवा विक्रेताओं में गहरी चिंता व्याप्त है।
ऑनलाइन दवा बिक्री पर दवा कारोबारियों का विरोध
प्रदेश के कई जिलों में केमिस्ट एसोसिएशन ने ऑनलाइन फार्मेसी के विरोध में व्यापक प्रदर्शन किए। जयपुर, उदयपुर और अन्य जिलों में मेडिकल स्टोरों ने एक दिन के लिए बंद रहकर अपनी नाराजगी जताई। हालांकि जयपुर में लगभग 80 प्रतिशत मेडिकल स्टोर खुले रहे। केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अनुसार, मेडिकल स्टोर बंद करने से हालात बेहतर नहीं होंगे बल्कि ऑनलाइन दवाओं की खरीद बढ़ेगी।
एआई का दवा बिक्री में दुरुपयोग
एसोसिएशन के प्रवक्ता अजय अग्रवाल ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीकों का दुरुपयोग कर प्रतिबंधित और नशीली दवाओं की ऑनलाइन खरीद में तेजी आई है। एआई की मदद से चिकित्सकीय पर्ची के बिना भी फर्जी प्रिस्क्रिप्शन बनाए जा रहे हैं, जिससे दवाओं की अवैध खरीद बढ़ रही है। यह स्थिति न केवल ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के नियमों के विरुद्ध है, बल्कि मरीजों के स्वास्थ्य के लिए भी जोखिम उत्पन्न कर रही है।
नशे की दवाओं और नकली दवाओं की बढ़ती आपूर्ति
- अनुचित तरीके से नशीली दवाओं की बिक्री बढ़ने की आशंका।
- नकली और घटिया गुणवत्ता वाली दवाओं की सप्लाई।
- बिना डॉक्टर के प्रमाणित पर्चे के दवाइयों की उपलब्धता।
- ऑनलाइन सप्लाई चेन में पारदर्शिता की कमी।
- स्वयं उपचार के कारण एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं।
एंटीबायोटिक्स और जीवन रक्षक दवाओं का दुरुपयोग
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष अमरीश कौशिक के अनुसार, ऑनलाइन दवा व्यापार के माध्यम से नकली दवाएं और जीवन रक्षक दवाओं की खरीद बढ़ी है। बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं का उपयोग मरीजों की सेहत पर गंभीर खतरा बन चुका है। इससे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जैसी स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं।
उदयपुर में दवा कारोबारियों का प्रदर्शन और मांगें
उदयपुर में दवा कारोबारी जिला कलेक्ट्री के बाहर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि कई ऑनलाइन कंपनियां बिना वैध चिकित्सकीय परामर्श और फर्जी ई-प्रिस्क्रिप्शन के जरिए दवाइयां घर पहुंचा रही हैं। इससे गलत दवा उपयोग और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहे हैं।
व्यापारियों की प्रमुख मांगें
- ऑनलाइन दवा बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाना।
- बिना सत्यापित प्रिस्क्रिप्शन दवाएं न देने की व्यवस्था।
- विवादित ऑनलाइन दवा बिक्री अधिसूचनाओं को वापस लेना।
- छोटे और मध्यम स्तर के केमिस्टों के अस्तित्व की सुरक्षा।
निष्कर्ष
ऑनलाइन दवा बिक्री से जुड़े सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे गंभीर होते जा रहे हैं। नकली दवाओं और फर्जी प्रिस्क्रिप्शन के जरिये दवाओं की विक्रय प्रक्रिया पर नियंत्रण न होने से मरीजों की जान को खतरा हो सकता है। इसलिए दवा कारोबारियों द्वारा उठाए गए सुरक्षा और नियमन की मांगों को सरकार द्वारा गंभीरता से लेना आवश्यक है ताकि दवा सुरक्षा और मरीजों का स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके।
इस विषय में जनता और नीति निर्माताओं के लिए जागरूकता बढ़ाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है ताकि सही तरीके से दवाओं की खरीद और उपयोग हो सके।






